इलाज के अभाव में बच्ची की मौत पर बवाल

पटना एम्स में इलाज के अभाव में एक बच्ची की मौत पर राजनीति गरमा गई है. दरअसल, जमुई जिले के कजरा गांव निवासी मजदूर रामबालक पत्नी के साथ बेटी रोशन का इलाज करवाने के लिए एम्स आए थे.  जानकारी न होने की वजह से पहले वह अस्पताल में भटकते रहे. उसके बाद जब ओपीडी काउंटर पर पहुंचे तो वहां लंबी लाइन लगी थी.

पर्ची कटवाने के लिए रामबालक ने लाइन में लगे लोगों से गुहार लगाई, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ. इस बीच छह दिन से बुखार और दर्द से पीड़ित बच्ची ने ओपीडी के बाहर ही इलाज के अभाव में दम तोड़ दिया. गौरतलब है कि पटना एम्स में इमरजेंसी सेवा नहीं है. विपक्षी दल राजद ने घटना की उच्च स्तरीय जांच की मांग की है.

रामबालक के लिए मुसीबतें यहीं कम नहीं हुई. बच्ची की मौत के बाद शव ले जाने के लिए अस्पताल ने एंबुलेंस भी नहीं दी. लाचार पिता कंधे पर ही बेटी का शव लेकर अस्पताल से निकल पड़े.

रिपोर्ट्स के मुताबिक रामबालक ने ओपीडी काउंटर पर मौजूद कलर्क से भी गुहार लगाई, लेकिन उसने भी कहा कि लाइन में आने पर ही पर्ची मिलेगी. रामबालक लाइन में लगने को मजबूर थे. जब वह काउंटर पर पहुंचे और पर्ची कटवाकर बाहर आए तब तक उनकी बेटी की मौत हो गई थी.


इतना ही नहीं अस्पताल प्रशासन ने रामबालक को एंबुलेस भी मुहैया नहीं करवाया. उनके पास उतने पैसे भी नहीं थे कि वह निजी वाहन किराये पर ले सकें. इसके बाद उन्होंने फुलवारी शरीफ तक करीब चार किमी अपने कंधे पर ही बच्ची का शव ढोया.

इस बारे में एम्स के निदेशक डॉक्टर प्रभात कुमार से बात की गई तो उन्होंने कहा कि उनके पास इस बारे में कोई जानकारी नहीं है. उन्होंने कहा कि जहां तक पर्ची का सवाल है तो गंभीर रूप से बीमार मरीजों का इलाज बिना पर्चे का किया जाता है. बाद में पर्ची बनावाई जाती है. अगर ऐसी घटना हुई है तो वह उसकी जांच करवाएंगे.

राजद प्रमुख लालू प्रसाद यादव ने घटना पर दुख जताते हुए राज्य की नीतीश सरकार की आलोचना की है. उन्होंने कहा कि इस सरकार को गरीब लोगों के स्वास्थ्य से कुछ लेना देना नहीं है. उन्होंने कहा कि बिहार में सब कुछ ठप्प हो चुका है. कानून-व्यवस्था, शिक्षा और स्वास्थ्य का बुरा है. राज्य में गरीब लोगों के इलाज की कोई सुविधा नहीं है. उनको इलाज के अभाव में मरने के लिए छोड़ दिया गया है.

उन्होंने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और उपमुख्यमंत्री सुशील मोदी पर निशाना साधते हुए कहा कि उनके पास मीडिया में फोटो खिंचवाने से फुर्सत नहीं है. वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को चेहरा दिखाने में व्यस्त हैं.

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