जब ‘खिलौने’ को मां समझकर पीने लगे दूध बाघ के शावक -जाने कारण

मध्य प्रदेश में तीन बाघ शावकों की मां के मर जाने के बाद बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के अधिकारियों ने एक ‘डमी टॉय बाघिन’ बनाकर उन्हें बचाया. ये तीनों शावक इस ‘डमी बाघिन’ को अपनी मां समझने लगे हैं और उस पर फिट किए गए निप्पलों से दूध भी पीते हैं.

इसके बाद बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के अधिकारियों का मानना है कि इन बाघ शावकों के बचने की संभावनाएं अब काफी बढ़ गई हैं.

बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के निदेशक मृदुल पाठक ने बताया, ‘‘बाघिन का शिकारियों द्वारा शिकार किए जाने के बाद उसके तीनों बच्चे जंगल में भटक गये थे. भटके हुए इन तीनों बाघ शावकों को जंगल से ढूंढ़ने के बाद हम इन्हें बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व लाए और एक बाड़े में रख दिया. एक विशेष डिजाइन से बनी हुई ‘डमी बाघिन’ भी इस बाड़े में रख दी. इनको दूध पिलाने के लिए ‘डमी बाघिन’ पर निप्पलों एवं बोतलों को फिट कर दिया.’’

उन्होंने कहा, ‘‘इन शावकों ने ‘डमी बाघिन’ पर लगाई गई निप्पलों से ऐसे दूध पीना शुरू कर दिया, जैसे वे अपनी मां के स्तन से दूध पीते थे.’’

पाठक ने बताया कि शुरूआत में इन शावकों को वन विभाग के अधिकारियों ने दूध एवं जरूरी दवाइयां दी, लेकिन बाद में निर्णय लिया गया कि इन्हें इंसानी दखल से दूर रखा जाए.

उन्होंने कहा, ‘‘मानव से इन शावकों को दूर रखने के लिए हमने ‘डमी बाघिन’ बनाकर इन्हें उसके पास रखने का फैसला किया.’’ उन्होंने कहा, ‘‘आश्चर्य की बात यह है कि ये बाघ शावक ‘डमी बाघिन’ को अपनी मां समझते हैं. वे न केवल ‘डमी बाघिन’ पर बोतल, निप्पल एवं अन्य चीजों से बनाये गये स्तनों से दूध पी रहे हैं, बल्कि इसके साथ लाड में चिपकने के साथ-साथ उछल-कूद कर मौज-मस्ती भी कर रहे हैं.’’

इन शावकों की मां को टी-। नाम से जाना जाता था और इस बाघिन का शव 19 जनवरी को वन कर्मियों को प्रदेश के शहडोल जिला मुख्यालय से लगभग 125 किलोमीटर दूर जंगल से सटे हुए इलाके में मिला था।. शव पर चोट के निशान के अलावा जले हुए के चिन्ह भी थे.

बाघिन का शव पाए जाने के एक सप्ताह बाद वन विभाग के अधिकारियों ने एक गांव से पांच लोगों को इसे विद्युत करंट देकर मारने के आरोप में गिरफ्तार किया था

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