सपना

मूषक राज दुलारे ने तो कुल का इज्जत ले डाला,

बिल्ली राजकुमारी को भरी सभा से ले भागा।

चूहो ने पहले से कर रखी थी सारी तैयारी,

शादी मे वनराज विराजे और कयी आये थे यारी।

शेर की खातिरदारी करते दिखाते बन्दर भाई

, मन ही मन बस सोचते दावत पड़ा है भारी।

बिल्ली रानी गुमशुम बैठी मन मे छोब छुपाये,

चूहे राजा नाच रहे है टाई कोट रमाये।

सज-धज कर कैट वाक करती है लोमड़ी रानी,

कोयल सुर और ताल मिलाये नाचते मोर मोरनी।

भालू जी तैयार नहीं हैं छोड़ने को अपना बाजा,

चींटा जी बने है पंडित पूछे कहां हैं राजा।

चूहे बिल्ली की शादी की यह अजीब सी घटना,

सुबह जो मेरी नींद खुली पता चला, था सपना । **

                                                                   __ अपर्णा सिंह

 

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